नई दिल्ली, 08 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रहे व्यापार समझौते का अंतरिम मसौदा सार्वजनिक किया गया। यह मसौदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच पिछले वर्ष हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद सामने आया है। सरकार पहले यह संकेत देती रही थी कि कृषि क्षेत्र इस समझौते से बाहर रहेगा, लेकिन मसौदे से साफ है कि यह दावा पूरी तरह सही नहीं है।
कृषि क्षेत्र में बाजार खोलने की शर्तें
अंतरिम समझौते में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत, अमेरिका के कई कृषि उत्पादों के लिए अपने बाजार को खोलेगा। इसके तहत सीमा शुल्क में कटौती, कुछ उत्पादों पर शून्य आयात शुल्क और टैरिफ रेट कोटा जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके बदले अमेरिका ने भारत पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति दी है।

किन अमेरिकी कृषि उत्पादों को मिलेगी भारत में पहुंच
व्हाइट हाउस और भारत सरकार द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, जिन उत्पादों को भारतीय बाजार में रियायतें मिलेंगी उनमें डीडीजीएस, सोयाबीन तेल, ट्री नट्स जैसे बादाम, अखरोट और पिस्ता, ताजे फल विशेष रूप से सेब और बैरीज, प्रसंस्कृत फल, कपास, ज्वार (रेड सोरगम) और पशु आहार से जुड़े उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा वाइन, स्प्रिट्स और कुछ गैर-अल्कोहॉलिक पेय पदार्थों को भी आयात में राहत दी जाएगी।
| उत्पाद श्रेणी | प्रमुख अमेरिकी उत्पाद |
|---|---|
| पशु आहार | डीडीजीएस |
| खाद्य तेल | सोयाबीन तेल |
| ड्राई फ्रूट्स | बादाम, पिस्ता, अखरोट |
| ताजे फल | सेब, बैरीज |
| फाइबर | कॉटन |
किन क्षेत्रों को रखा गया है बाहर
सरकार और मसौदे दोनों में यह स्पष्ट किया गया है कि गेहूं, चावल, मक्का, चीनी, डेयरी और पॉल्ट्री उत्पाद इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं। भारत इन अनाजों के उत्पादन में आत्मनिर्भर है और गैर-बासमती चावल का दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक भी है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए डेयरी और पॉल्ट्री को संरक्षण दिया गया है।
किस किसानों पर पड़ेगा सबसे अधिक असर
सोयाबीन किसानों के लिए यह समझौता सबसे बड़ी चिंता बन सकता है। डीडीजीएस, जो अमेरिका में एथेनॉल उत्पादन के बाद निकलने वाला सह-उत्पाद है, सोयामील का सीधा प्रतिद्वंद्वी है। पिछले दो वर्षों में सोयाबीन किसानों को एमएसपी के आसपास कीमत न मिलने के पीछे डीडीजीएस आयात को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में बड़े पैमाने पर सोयाबीन की खेती होती है और इन राज्यों के किसानों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसी तरह अमेरिकी सेब के आयात में वृद्धि से घरेलू सेब उत्पादकों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।
व्यापार संतुलन और रणनीतिक तस्वीर
भारत अमेरिका को करीब छह अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात करता है, जबकि अमेरिका से लगभग तीन अरब डॉलर का कृषि आयात करता है। इस तरह कृषि व्यापार में भारत को लगभग तीन अरब डॉलर का सरप्लस मिलता है। अमेरिका इस असंतुलन को कम करना चाहता है और दोनों देशों के बीच कुल व्यापार को आने वाले वर्षों में 200 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
कुल मिलाकर, इंडो-यूएस ट्रेड डील भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और उपभोक्ता बाजार के लिए अवसर पैदा कर सकती है, लेकिन कृषि क्षेत्र के कुछ हिस्सों, खासकर सोयाबीन, सेब और कपास किसानों के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। समझौते का वास्तविक असर तब पूरी तरह स्पष्ट होगा जब शुल्क दरों, कोटा और अन्य शर्तों का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।
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