नई दिल्ली/मुंबई, 27 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): रुपये में ऐतिहासिक गिरावट (Indian Rupee All-Time Low) – भारतीय रुपया शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में बड़ी गिरावट के साथ डॉलर के मुकाबले 94.29 के स्तर तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले पिछले सत्र में रुपया 93.96 पर बंद हुआ था।
इस हफ्ते की शुरुआत में ही रुपया 93.98 के अपने पुराने रिकॉर्ड निचले स्तर को छू चुका था, लेकिन अब इसमें और कमजोरी आ गई है। फरवरी के अंत में शुरू हुए पश्चिम एशिया तनाव के बाद से रुपये में लगभग 3.5% की गिरावट दर्ज की गई है।
Indian Rupee All-Time Low के बड़े कारण
रुपये की कमजोरी के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे जुड़ा एनर्जी संकट है। तेल की कीमतें लगातार $100 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इससे न केवल चालू खाते (Current Account) पर असर पड़ता है बल्कि महंगाई भी बढ़ने का खतरा रहता है।
इसके अलावा, ग्लोबल इक्विटी मार्केट पर दबाव और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की करेंसी को कमजोर किया है।
RBI की भूमिका पर नजर
अब बाजार की नजर Reserve Bank of India (RBI) के संभावित कदमों पर टिकी है।
ट्रेडर्स को उम्मीद है कि RBI स्पॉट और नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) मार्केट में हस्तक्षेप कर सकता है। पिछले सत्र में भी केंद्रीय बैंक ने रुपये की तेज गिरावट को थामने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी।
अगर RBI आक्रामक हस्तक्षेप करता है, तो रुपये को अल्पकालिक राहत मिल सकती है।

रुपये का हालिया प्रदर्शन
| तारीख / अवधि | डॉलर के मुकाबले रुपया |
|---|---|
| 27 मार्च (सुबह) | 94.29 |
| पिछला बंद (बुधवार) | 93.96 |
| सप्ताह की शुरुआत | 93.98 |
| फरवरी अंत से गिरावट | ~3.5% |
विशेषज्ञों की राय: अभी और उतार-चढ़ाव संभव
केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया के अनुसार, वैश्विक तनाव कम होने की संभावना जरूर है, लेकिन स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। उनका कहना है कि अगर तनाव कम होता है, तो रुपये में 1 से 1.5 रुपये तक की रिकवरी हो सकती है। हालांकि, जब तक स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
वहीं, ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein का अनुमान है कि अगर मौजूदा हालात बने रहे, तो रुपया इस साल 98 प्रति डॉलर के स्तर तक भी पहुंच सकता है।
आगे क्या रहेगा रुख?
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में रुपये की दिशा कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी—जैसे कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव, और ब्याज दरों का रुख।
महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए यह भी कहा जा रहा है कि RBI अगले 12 महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।
फिलहाल, निवेशकों और कारोबारियों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है क्योंकि करेंसी मार्केट में अस्थिरता अभी खत्म होती नहीं दिख रही।
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