नई दिल्ली, 18 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी कर ली है। पार्टी ने घोषणा की है कि वह 5 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में विशेष जनसंपर्क अभियान चलाएगी, जहां उसे आशंका है कि अमेरिकी कृषि और खाद्य उत्पादों के आयात से किसानों पर सबसे अधिक नकारात्मक असर पड़ेगा।
कांग्रेस रणनीतिकारों के अनुसार, यह अभियान सीधे किसानों, सहकारी संगठनों और कृषि मंडियों तक पहुंचने पर केंद्रित होगा, ताकि समझौते के संभावित प्रभावों को जमीनी स्तर पर उजागर किया जा सके।
कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और बिहार को अपने अभियान के लिए चुना है। पार्टी का कहना है कि ये राज्य सोयाबीन, कपास, मक्का और फलों के बड़े उत्पादक हैं और अमेरिका से आयात बढ़ने पर इन्हीं क्षेत्रों के किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
बजट चर्चा में राहुल गांधी का सीधा हमला
संसद में आम बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लगभग पूरा भाषण भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर केंद्रित रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के हितों से समझौता किया है और यह करार किसानों के साथ विश्वासघात है।
सरकार ने कांग्रेस के इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि समझौता देशहित और किसानों के दीर्घकालिक लाभ को ध्यान में रखकर किया गया है।
राज्यों के नेताओं के साथ अहम बैठक
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी 20 फरवरी को इन छह राज्यों के प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ रणनीतिक बैठक करेंगे। बैठक में किसान संगठनों, मंडियों और ग्रामीण इलाकों तक पहुंचने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इससे पहले 14 फरवरी को राहुल गांधी किसान नेताओं से मुलाकात कर उनके अधिकार, सुरक्षा और सम्मान के लिए साथ खड़े रहने का भरोसा जता चुके हैं।
भारत-अमेरिका समझौते की रूपरेखा
6 फरवरी को व्हाइट हाउस और भारत सरकार ने संयुक्त बयान जारी कर बताया कि दोनों देश एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमत हुए हैं। इसमें बाजार पहुंच बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और कई उत्पादों पर शुल्क में कटौती जैसे प्रावधान शामिल हैं।
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट के मुताबिक भारत अमेरिका से कई कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क कम या खत्म कर सकता है। इनमें DDG (डिस्टिल्ड ड्रायड ग्रेन्स), रेड सोरघम, सोयाबीन ऑयल, सूखे मेवे, ताजे और प्रोसेस्ड फल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं। कांग्रेस का दावा है कि इससे घरेलू किसानों की कीमतें और MSP दबाव में आ सकती हैं।
वरिष्ठ नेता मैदान में उतरेंगे
कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर अभियान को धार देने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। भूपेश बघेल, सचिन पायलट, दीपेंद्र सिंह हुड्डा और सुखविंदर सिंह सुक्खू इन राज्यों में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर किसानों को समझौते के संभावित असर के बारे में जागरूक करेंगे।
मक्का और सोयाबीन किसानों पर असर का दावा
कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि अमेरिका से सबसे बड़ा आयात DDG यानी प्रोसेस्ड मक्का का हो सकता है। उनके अनुसार, भारत में 2025-26 में करीब 430 लाख मीट्रिक टन मक्का उत्पादन हुआ, जबकि अमेरिका का उत्पादन 42.5 करोड़ मीट्रिक टन है और वह भारत जैसे बड़े बाजार की तलाश में है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ड्यूटी-फ्री सोयाबीन तेल का आयात हुआ, तो मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक के सोयाबीन किसानों की MSP और आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
कपास और टेक्सटाइल सेक्टर पर भी संकट की आशंका
कांग्रेस का दावा है कि इस समझौते का बड़ा असर कपास किसानों और वस्त्र उद्योग पर भी पड़ेगा। भारतीय गारमेंट्स पर 18% शुल्क के चलते तिरुपुर, सूरत, पानीपत और लुधियाना जैसे टेक्सटाइल हब वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ सकते हैं।
कुलमिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस इसे “किसान बनाम सरकार” के मुद्दे के रूप में पेश करने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह अभियान कितना असर डालता है और सरकार किस तरह जवाब देती है, इस पर देश की राजनीति और कृषि नीति—दोनों की दिशा निर्भर करेगी।
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