उर्वरक सब्सिडी प्रणाली पूरी तरह डिजिटल: नए साल में सरकार का बड़ा रिफॉर्म

नई दिल्ली, 2 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत सरकार के उर्वरक विभाग ने वर्ष 2026 के पहले ही दिन एक बड़ा संरचनात्मक सुधार लागू करते हुए करीब ₹2 लाख करोड़ की वार्षिक उर्वरक सब्सिडी को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। इस पहल की औपचारिक शुरुआत केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन से की।

केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने इस अवसर पर कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘विकसित भारत’ के विजन को साकार करने में मील का पत्थर साबित होगा। उनके अनुसार, पूरे उर्वरक इकोसिस्टम के डिजिटल होने से न सिर्फ विभाग और कंपनियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि इसका अंतिम लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा।

उर्वरक सचिव रजत कुमार मिश्र ने स्पष्ट किया कि यह पहल सिर्फ कागजी बिलों को हटाने तक सीमित नहीं है। नए डिजिटल बिलिंग सिस्टम में आधुनिक तकनीक को इस तरह जोड़ा गया है कि कच्चे माल की खरीद से लेकर उर्वरक के अंतिम उत्पादन और बिक्री तक पूरी वैल्यू चेन एक ही प्लेटफॉर्म पर ट्रैक की जा सकेगी। इससे निगरानी, पारदर्शिता और दक्षता—तीनों में सुधार होगा।

iFMS–PFMS इंटीग्रेशन: सिस्टम का दिल

उर्वरक विभाग ने अपने साथ काम करने वाले पीएसयू, सहकारी संस्थाओं और निजी उर्वरक कंपनियों के सभी वित्तीय लेन-देन को अपने इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) के जरिए वित्त मंत्रालय के पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) से जोड़ दिया है।

मुख्य लेखा नियंत्रक संतोष कुमार ने इसे दोनों प्लेटफॉर्म्स के बीच विशिष्ट तकनीकी साझेदारी का परिणाम बताया, जिससे अब विभाग के सभी भुगतान पूरी तरह डिजिटल और ट्रेस करने योग्य हो गए हैं।

भुगतान में देरी खत्म, रियल-टाइम ट्रैकिंग

संयुक्त सचिव (वित्त एवं लेखा) मनोज सेठी के अनुसार, नई व्यवस्था से सब्सिडी बिलों के भुगतान में होने वाली देरी समाप्त हो जाएगी। अब साप्ताहिक सब्सिडी समय पर जारी की जा सकेगी।

‘ई-बिल पोर्टल’ के जरिए खाद कंपनियां ऑनलाइन क्लेम जमा कर सकेंगी और रियल-टाइम में भुगतान की स्थिति देख सकेंगी। इससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर, फाइल मूवमेंट और कागजी अड़चनों से राहत मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डिजिटल रिफॉर्म उर्वरक उद्योग में कैश फ्लो सुधार, बेहतर योजना और पारदर्शिता लाएगा। भुगतान समय कम होने से कंपनियों की लागत घटेगी और उर्वरकों की उपलब्धता स्थिर रहेगी, जिसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा।

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