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डोनाल्ड ट्रंप की भारत को चेतावनी, रूसी तेल पर नहीं माना तो बढ़ सकते हैं टैरिफ

नई दिल्ली, 05 जनवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर दबाव बढ़ा दिया है। ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि अगर भारत रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका का सहयोग नहीं करता, तो भारतीय सामानों पर टैरिफ और बढ़ाया जा सकता है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रंप ने यह बयान एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया और इसे भारत-अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड बातचीत से भी जोड़कर देखा।

रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे असल में मुझे खुश करना चाहते थे… पीएम मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं। वह जानते थे कि मैं खुश नहीं था। वे ट्रेड करते हैं और हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ बढ़ा सकते हैं।”

ट्रंप ने एक बार फिर यह दोहराया कि वह चाहते हैं कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद करे।

भारत-रूस एनर्जी रिश्तों पर फिर तनाव

ट्रंप के ये बयान भारत और रूस के बीच ऊर्जा संबंधों को लेकर तनाव को फिर हवा देते हैं। कुछ महीने पहले भी ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भरोसा दिया है कि भारत रूसी तेल की खरीद बंद कर देगा। हालांकि भारत सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है।

पहले ही 50% टैरिफ लगा चुका है अमेरिका

रूसी तेल की बड़े पैमाने पर खरीद को लेकर अमेरिका पहले ही भारत पर सख्त रुख अपना चुका है। पिछले साल अमेरिका ने भारतीय सामानों के आयात पर टैरिफ दोगुना कर 50 प्रतिशत कर दिया था। फिलहाल दोनों देश एक संभावित ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हो सका है।

साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत डिस्काउंटेड रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया। पश्चिमी देश इसका विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि तेल से होने वाली कमाई रूस के युद्ध प्रयासों की फंडिंग में मदद करती है, इसलिए रूस के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाए गए हैं।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका-भारत के बीच ट्रेड डील पर सहमति नहीं बनती और रूसी तेल को लेकर मतभेद बने रहते हैं, तो टैरिफ विवाद और गहराने की आशंका है। इसका असर भारत के निर्यात, रुपये और ग्लोबल ट्रेड समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप की ताजा चेतावनी से साफ है कि रूसी तेल भारत-अमेरिका संबंधों में बड़ा टकराव बिंदु बना हुआ है। आने वाले महीनों में यह मुद्दा द्विपक्षीय व्यापार और कूटनीति दोनों के लिए अहम रहने वाला है।

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