नई दिल्ली, 17 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): इंटरनेशनल मार्केट में कॉटन की कीमतों में जोरदार तेजी देखने को मिली है। कॉटन का भाव $67 प्रति पाउंड के पार पहुंच गया है, जो पिछले 8 महीनों का उच्च स्तर है।
पिछले एक सप्ताह में कॉटन की कीमतों में 4% और एक महीने में 6% की बढ़त दर्ज की गई है, जबकि साल 2026 में अब तक यह करीब 5% चढ़ चुका है।
इस तेजी के पीछे प्रमुख वजह वैश्विक तनाव और सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं, जिससे बाजार को सपोर्ट मिला है।
CCI की बिक्री से किसानों की चिंता
भारत में कॉटन बाजार में एक अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) द्वारा बाजार में स्टॉक की बिक्री की जा रही है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
कई किसान बेहतर भाव की उम्मीद में अपनी फसल रोककर बैठे थे, लेकिन CCI द्वारा कम कीमत पर बिक्री करने से उन्हें नुकसान का डर है। इससे बाजार में तेजी की उम्मीद कमजोर पड़ रही है।
भारत बना कॉटन एक्सपोर्ट में नंबर 1
भारत ने हाल ही में कॉटन प्रोडक्ट्स के निर्यात में चीन को पीछे छोड़ दिया है।
2025 में अमेरिका को निर्यात के मामले में भारत ने चीन से आगे निकलकर सबसे बड़ा सप्लायर बनने का दर्जा हासिल किया। अपैरल और होम टेक्सटाइल सेगमेंट में भारत की पकड़ मजबूत हुई है, जो वैश्विक बाजार में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
हल्दी में रिकवरी—गिरावट के बाद तेजी
हल्दी की कीमतों में भी हाल के दिनों में तेजी देखने को मिली है। NCDEX पर अप्रैल वायदा ₹15,000 के करीब पहुंच गया है और लगातार दूसरे दिन इसमें बढ़त दर्ज हुई है।
हालांकि, मार्च में कीमतों में 4% की गिरावट आई और 2026 में अब तक कुल 15% तक गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
हल्दी कीमत ट्रेंड
| अवधि | कीमतों की चाल |
|---|---|
| 1 सप्ताह | तेजी |
| मार्च 2026 | ~4% गिरावट |
| 2026 (अब तक) | ~15% गिरावट |
| हालिया स्तर | ₹15,000 के करीब |
सप्लाई चिंता और मौसम का असर
हल्दी की कीमतों को सपोर्ट मिलने की बड़ी वजह मंडियों में कम आवक और मजबूत घरेलू व निर्यात मांग है। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे क्वालिटी पर असर पड़ने की आशंका है। किसानों और स्टॉकिस्टों द्वारा स्टॉक कम करने से भी बाजार में सप्लाई घटने का अनुमान है, जिससे आगे कीमतों में सपोर्ट बना रह सकता है।
कुलमिलाकर, कॉटन और हल्दी दोनों ही कमोडिटी बाजार में इस समय अलग-अलग कारणों से सुर्खियों में हैं। जहां कॉटन को वैश्विक सपोर्ट और एक्सपोर्ट से मजबूती मिल रही है, वहीं हल्दी में सप्लाई और मौसम की वजह से तेजी देखी जा रही है।
आने वाले समय में इन दोनों कमोडिटी की चाल काफी हद तक वैश्विक हालात और घरेलू सप्लाई पर निर्भर करेगी।
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