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Census 2027: भारत की पहली डिजिटल जनगणना शुरू, अब नागरिक खुद भी कर सकेंगे गणना

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Census 2027 Digital India - KB

नई दिल्ली, 01 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): – Census 2027 – भारत में 16वीं जनगणना की प्रक्रिया 1 अप्रैल 2026 से औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है, क्योंकि यह देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना है। इससे पहले वर्ष 2011 में पारंपरिक तरीके से जनगणना की गई थी, जबकि 2021 में होने वाली जनगणना कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित करनी पड़ी थी।

Census 2027 के लिए इस बार सरकार ने तकनीक का व्यापक उपयोग करते हुए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट किया है, जिससे डेटा संग्रह, सत्यापन और विश्लेषण पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सटीक होगा।

सरकार की बड़ी पहल और बजट

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंजूरी दी गई थी। केंद्र सरकार ने इसके लिए ₹11,718.24 करोड़ का बजट निर्धारित किया है।

Census 2027 – भारतीय जनगणना को दुनिया की सबसे बड़ी प्रशासनिक और सांख्यिकीय कवायद माना जाता है। इसमें देश के हर नागरिक और हर घर तक पहुंच बनाना शामिल होता है, जो इसे अत्यंत जटिल और व्यापक प्रक्रिया बनाता है।

दो चरणों में पूरी होगी Census 2027

चरणअवधिविवरण
पहला चरणअप्रैल – सितंबर 2026हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सर्वे
दूसरा चरणफरवरी 2027जनसंख्या गणना

Census 2027 – जनगणना को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में घरों की सूची तैयार की जाएगी और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी। दूसरे चरण में व्यक्तियों से संबंधित विस्तृत जनसंख्या डेटा जुटाया जाएगा।

कुछ पर्वतीय और बर्फ प्रभावित क्षेत्रों जैसे लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में यह प्रक्रिया अलग समय पर संचालित की जाएगी।

मोबाइल ऐप और रियल-टाइम मॉनिटरिंग

Census 2027

इस बार डेटा संग्रह के लिए विशेष मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा, जो एंड्रॉयड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। इसके साथ ही Census Management and Monitoring System (CMMS) के जरिए पूरे अभियान की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी।

इस डिजिटल सिस्टम से डेटा में त्रुटियों की संभावना कम होगी और तुरंत सुधार भी संभव होगा, जिससे पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

30 लाख से अधिक कर्मचारी तैनात

इस विशाल कार्य को पूरा करने के लिए लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारियों की तैनाती की गई है। इनमें एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हैं।

इन कर्मचारियों को घर-घर जाकर डेटा संग्रह, सत्यापन और निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा, उन्हें अतिरिक्त कार्य के लिए मानदेय भी प्रदान किया जाएगा।

33 सवालों के जरिए जुटेगा डेटा

Census 2027 के पहले चरण में कुल 33 सवालों के माध्यम से नागरिकों से जानकारी जुटाई जाएगी। इन सवालों में घर के सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम और जेंडर, सामाजिक वर्ग (SC/ST या अन्य), घर का स्वामित्व, कमरों की संख्या और विवाहित जोड़ों की जानकारी शामिल है।

इसके अलावा, पानी के स्रोत, बिजली की उपलब्धता, शौचालय, किचन, ईंधन (LPG/PNG), इंटरनेट, मोबाइल फोन, कंप्यूटर, वाहन और अन्य सुविधाओं से संबंधित डेटा भी एकत्र किया जाएगा।

यह जानकारी सरकार को सामाजिक और आर्थिक योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने में मदद करेगी।

जातिगत गणना का बड़ा फैसला

इस बार की जनगणना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जातिगत डेटा का संग्रह है। स्वतंत्रता के बाद पहली बार बड़े स्तर पर जाति से जुड़ी जानकारी एकत्र की जाएगी।

ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो 1931 के बाद से व्यापक जातिगत जनगणना नहीं हुई थी। अब सरकार के इस निर्णय से सामाजिक न्याय और कल्याणकारी योजनाओं के लिए अधिक सटीक डेटा उपलब्ध होगा।

Census 2027 में सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा

इस जनगणना में नागरिकों को खुद अपनी जानकारी भरने का विकल्प भी दिया गया है। लोग 16 भाषाओं में ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन कर सकेंगे।

इसके लिए उन्हें एक 16 अंकों की यूनिक आईडी दी जाएगी, जिसे बाद में फील्ड अधिकारी के साथ सत्यापन के लिए साझा करना होगा। यह सुविधा डिजिटल भागीदारी को बढ़ावा देगी और प्रक्रिया को और आसान बनाएगी।

तकनीकी विकास की दिशा में बड़ा कदम

Census 2027 भारत के प्रशासनिक और तकनीकी विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। डिजिटल तकनीक, सेल्फ-एन्यूमरेशन और जातिगत डेटा संग्रह जैसी विशेषताएं इसे पहले की जनगणनाओं से अलग बनाती हैं।

यह न केवल देश की जनसंख्या का सटीक चित्र प्रस्तुत करेगी, बल्कि भविष्य की नीतियों, योजनाओं और संसाधनों के बेहतर वितरण के लिए मजबूत आधार भी तैयार करेगी। आने वाले समय में इसके परिणाम भारत की विकास यात्रा को नई दिशा दे सकते हैं।

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