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Bihar Budget: कृषि विभाग का 3446 करोड़ का बजट पारित, एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर और प्राकृतिक खेती पर जोर

पटना, 24 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): बिहार विधान परिषद में सोमवार को कृषि विभाग का वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्ताव पारित कर दिया गया। बिहार विधानसभा से बजट की स्वीकृति के बाद कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने बताया कि स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय सहित विभागीय योजनाओं के संचालन के लिए 3446.45 करोड़ रुपये की बजट मांग सदन के समक्ष रखी गई थी, जिसे ध्वनिमत से मंजूरी मिली।

मंत्री ने इसके लिए सदन के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन का परिणाम है।

कृषि रोड मैप से बदली बिहार की तस्वीर

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार में कृषि विकास की अपार संभावनाओं को साकार करने के लिए वर्ष 2008 से कृषि रोड मैप के तहत योजनाबद्ध ढंग से काम किया जा रहा है। वर्तमान में चतुर्थ कृषि रोड मैप (2023-28) का सफल क्रियान्वयन जारी है। राज्य में चावल, गेहूं, मक्का, दलहन और तिलहन प्रमुख फसलें हैं और पिछले वर्षों में उत्पादन व उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 की तुलना में राज्य का खाद्यान्न उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़ चुका है। राज्य सरकार के सात निश्चय-3 (2025-2030) के अंतर्गत किसान हितैषी कार्यक्रमों को और गति दी जा रही है। मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा 3272.83 करोड़ रुपये की योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।

Bihar Agri Infrastructure Mission: 1 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी

राज्य सरकार ने “Bihar Agri Infrastructure Mission” के गठन का संकल्प लिया है, जिसके तहत शुरुआती चरण में 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना है। इसके अंतर्गत प्रदेशभर में छंटाई और ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन चैम्बर्स, गोदाम और प्रोसेसिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

इसके साथ ही सुगंधित चावल की किस्मों—सोनाचूर, मोकरी, कतरनी और मर्चा—के उत्पादन और निर्यात को बढ़ाने के लिए प्रोसेसिंग व पैकेजिंग यूनिट लगाए जाएंगे। श्री अन्न के उत्पादन को दोगुना करने, स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसे एक्जोटिक फलों के उत्पादन और निर्यात को प्रोत्साहन देने की भी योजना है।

उपज मंडियों का कायाकल्प और ई-नाम से जुड़ाव

राज्य के 53 कृषि उपज बाजार प्रांगणों के आधुनिकीकरण का कार्य किया जा रहा है। इनमें से 20 बाजार पहले ही e-NAM से जुड़ चुके हैं, जबकि 34 बाजारों को इससे जोड़ने की प्रक्रिया जारी है। किसानों को बेहतर कीमत दिलाने के उद्देश्य से भंडारण, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन: ऐतिहासिक उपलब्धि

कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों के परिश्रम और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है कि वर्ष 2024-25 में बिहार में अब तक का सर्वाधिक खाद्यान्न उत्पादन दर्ज किया गया है।

वर्षखाद्यान्न उत्पादन
2005आधार स्तर
2024-25326.62 लाख टन

यह उत्पादन राज्य के कृषि इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।

स्वीट कॉर्न, दलहन और मखाना को बढ़ावा

बीज की उपलब्धता को कृषि विकास की आधारशिला बताते हुए मंत्री ने कहा कि 2024-25 में स्वीट कॉर्न और बेबी कॉर्न को बढ़ावा देने के लिए 10,929 किसानों के बीच 178.16 क्विंटल बीज वितरित किए गए। दलहन फसलों के विस्तार के लिए 4.71 लाख से अधिक किसानों को बीज उपलब्ध कराए गए।

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 300 करोड़ रुपये की लागत से 43 मखाना भंडारण संरचनाओं का निर्माण कराया गया है।

प्राकृतिक और जैविक खेती पर फोकस

रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए राज्य सरकार जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है। बिहार राज्य जैविक मिशन के अंतर्गत सभी 38 जिलों में योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके तहत 50,000 एकड़ भूमि पर क्लस्टर आधारित प्राकृतिक खेती की जाएगी, जिसमें 400 क्लस्टर बनाए जाएंगे।

मंत्री ने बताया कि “कृषि जन कल्याण चौपाल” कार्यक्रम के जरिए 8.47 लाख से अधिक किसानों को आधुनिक तकनीकों और योजनाओं की जानकारी दी जा चुकी है।

कुलमिलाकर, बिहार एग्रीकल्चर बजट 2026-27 राज्य को एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर, प्राकृतिक खेती और कृषि नवाचार का केंद्र बनाने की दिशा में एक ठोस रोडमैप प्रस्तुत करता है। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से किसानों की आय में वृद्धि और बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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