अहमदाबाद, 28 जुलाई (कृषि भूमि डेस्क): गुजरात की प्रमुख कृषि मंडियों में जीरे की कीमतों में नरमी देखने को मिल रही है। बीते तीन दिनों में जीरा ₹50 से ₹100 प्रति क्विंटल तक सस्ता हो गया है। व्यापारियों और विश्लेषकों का कहना है कि घरेलू और निर्यात मांग में ठहराव तथा कुछ क्षेत्रों से आवक में बढ़ोतरी के कारण बाजार पर दबाव बना है।
मंडी भाव में नरमी का रुझान
राज्य की प्रमुख जीरा मंडी उंझा में जीरे की औसत कीमत बीते हफ़्ते ₹18,800–₹19,000 प्रति क्विंटल रही, जबकि सप्ताह की शुरुआत में यह ₹19,100–₹19,200 तक थी। थोक बाजार में भी मांग कमजोर बनी हुई है।
एक व्यापारी ने बताया,”उंझा मंडी में अच्छी क्वालिटी के जीरे का दाम ₹19,000 से ऊपर नहीं जा पा रहा। सामान्य ग्रेड का जीरा ₹18,500 तक बिक रहा है। निर्यातकों की खरीद भी सीमित है।’
कीमतों में गिरावट के प्रमुख कारण
- निर्यात मांग में ठहराव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों, खासकर चीन और मध्य-पूर्व से अभी बड़े ऑर्डर नहीं आ रहे हैं, जिससे निर्यातकों की खरीद सुस्त पड़ी है।
- स्थानीय मंडियों में आवक में इजाफा: राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों से नई आवक शुरू हो गई है, जिससे आपूर्ति का दबाव बढ़ा है।
- फ्यूचर्स बाजार में कमजोरी: एनसीडीईएक्स (NCDEX) पर भी जीरे के वायदा अनुबंधों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे हाजिर बाजार पर मनोवैज्ञानिक असर पड़ा है।
इस हफ़्ते जीरा बाजार में स्थिति कैसी रह सकती है?
विश्लेषकों का मानना है कि यदि निर्यात (Export) मांग में सुधार नहीं हुआ और बारिश के चलते फसल की स्थिति बेहतर बनी रही, तो जीरे की कीमतों में और गिरावट संभव है। कृषि बाजार से बात करते हुए उंझा मंडी के एक ट्रेडर ने कहा, ‘इस हफ़्ते जीरा बाजार ₹18,500–₹19,000 के बीच स्थिर हो सकता है, जब तक कि कोई बड़ा ऑर्डर या सप्लाई में रुकावट न आए। फिलहाल फसल की स्थिति भी संतुलित है।’
गुजरात में जीरे की कीमतों में हालिया गिरावट ने व्यापारियों और किसानों दोनों को सतर्क कर दिया है। मौजूदा स्थिति में बाजार की दिशा निर्यात मांग, वैश्विक भाव और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन पर निर्भर करेगी।
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