मुंबई, 26 मार्च (कृषि भूमि ब्यूरो): महाराष्ट्र विधानसभा में पेश की गई कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल की ताज़ा रिपोर्ट (CAG रिपोर्ट) में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के महाराष्ट्र में क्रियान्वयन को लेकर गंभीर कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट में योजना के तहत देरी, कमजोर निगरानी, पारदर्शिता की कमी और फंड के अप्रभावी उपयोग को प्रमुख समस्याओं के रूप में चिन्हित किया गया है।
अधूरे और लंबित कार्यों का बड़ा आंकड़ा
बुधवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 2019-20 और 2023-24 के बीच मंज़ूर 25.72 लाख कामों में से सिर्फ़ 52.81 प्रतिशत ही पूरे हुए। 6,725.65 करोड़ रुपये के काम पूरे हुए, जबकि 19.57 फ़ीसदी (5.03 लाख काम) अधूरे रह गए और 27.62 फ़ीसदी (7.10 लाख काम) मार्च 2025 तक शुरू ही नहीं हो पाए थे। लगभग 2.48 लाख काम (35 फ़ीसदी) तीन साल से ज़्यादा समय से अटके हुए थे, साथ ही 2019-20 से पहले के 3.03 लाख कामों का बैकलॉग भी बाकी था।
कार्यों की स्थिति (2019-2024)
| श्रेणी | प्रतिशत | संख्या (लगभग) |
|---|---|---|
| पूर्ण कार्य | 52.81% | 13.58 लाख |
| अधूरे कार्य | 19.57% | 5.03 लाख |
| शुरू नहीं हुए | 27.62% | 7.10 लाख |
फंड उपलब्ध, लेकिन उपयोग में कमी
13,957.47 करोड़ रुपये का फंड उपलब्ध होने के बावजूद, ऑडिट में फंड के इस्तेमाल और प्लानिंग में कमियां सामने आईं। यह योजना, जो ग्रामीण परिवारों को हर साल 100 दिनों तक मज़दूरी वाला रोज़गार देने की गारंटी देती है, लगातार अच्छे नतीजे देने में नाकाम रही है।
रोजगार मांग और उपलब्धता में अंतर
काम की मांग के मामले में भी भागीदारी कम रही। औसतन 117.98 लाख रजिस्टर्ड परिवारों में से सिर्फ़ 19 फ़ीसदी (21.97 लाख) ने ही काम मांगा। जिन लोगों ने काम मांगा, उनमें से 99.73 फ़ीसदी को रोज़गार दिया गया, लेकिन सिर्फ़ 1.71 लाख परिवारों (8.7 फ़ीसदी) ने ही पूरे 100 दिन काम किया।
मजदूरी भुगतान और बकाया मुद्दे
रिपोर्ट में मजदूरी भुगतान में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। औसतन लगभग 7 फ़ीसदी मज़दूरी के भुगतान में देरी हुई, और अधिकारियों ने 5.88 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने से मना कर दिया, जबकि कानून में इस तरह से मुआवज़ा रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा, अक्टूबर 2024 तक 35.32 करोड़ रुपये की मजदूरी बकाया पाई गई, जबकि मजदूरी, सामग्री और करों के मद में कुल 541.92 करोड़ रुपये की देनदारी लंबित रही।
CAG रिपोर्ट: जॉब कार्ड और रिकॉर्ड में गड़बड़ी
कार्यान्वयन के स्तर पर, पंजीकरण और रिकॉर्ड रखने में कमियां पाई गईं। जांच में पाया गया कि कई ग्राम पंचायतों में जॉब कार्ड जारी करने में देरी हुई। 15,077 परिवारों में से 91 प्रतिशत को जॉब कार्ड मिले, लेकिन 52 प्रतिशत को देर से मिले।
48 पंचायतों में से 44 में डुप्लीकेट जॉब कार्ड पाए गए, और 46 प्रतिशत पंचायतों में घर-घर सर्वे ही नहीं किया गया।
योजना और निगरानी में खामियां
![]()
योजना निर्माण में देरी, बेसलाइन सर्वे का अभाव और श्रम बजट तैयार करने में लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई। राज्य की 28,279 ग्राम पंचायतों में से 2,258 में ग्राम रोजगार सहायकों की नियुक्ति नहीं हुई।
336 कार्यों के भौतिक सत्यापन में 65 प्रतिशत स्थानों पर डिस्प्ले बोर्ड नहीं पाए गए, जबकि 30 प्रतिशत कार्यों की जियो-टैगिंग लंबित थी।
सामाजिक ऑडिट और वसूली में कमजोरी
रिपोर्ट में बताया गया कि 72.43 प्रतिशत से 95.67 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में सामाजिक ऑडिट प्रभावी ढंग से नहीं हुए। गबन के 1,084 मामलों में से 11.22 करोड़ रुपये की वसूली तय की गई थी, लेकिन 4.44 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं।
CAG की सिफारिशें
CAG ने निगरानी तंत्र को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इनमें सभी जिलों में ‘स्टेट क्वालिटी मॉनिटर’ की नियुक्ति, सामाजिक ऑडिट को सख्ती से लागू करना और वित्तीय गड़बड़ियों में तेजी से वसूली शामिल है।
कुलमिलाकर, यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि महाराष्ट्र में MGNREGS जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में संरचनात्मक और प्रशासनिक कमियां हैं। यदि इन मुद्दों को समय रहते नहीं सुधारा गया, तो ग्रामीण रोजगार और विकास पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45