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Wheat Export: सरकार ने 25 लाख टन गेहूं निर्यात की अधिसूचना जारी की, प्रतिबंध नीति यथावत

नई दिल्ली, 25 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्र सरकार ने मंगलवार को 25 लाख टन गेहूं निर्यात – Wheat Export – की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि, गेहूं निर्यात पर लागू प्रतिबंध की नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। महानिदेशालय विदेशी व्यापार (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि गेहूं की निर्यात नीति अभी भी “प्रतिबंधित” श्रेणी में ही रहेगी, लेकिन विशेष अनुमति के तहत 25 लाख टन निर्यात की छूट दी गई है। इसके विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

आटा और संबंधित उत्पादों पर भी सीमित मंजूरी

सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात पर लगे प्रतिबंध को बरकरार रखा है। इसके बावजूद अतिरिक्त 5 लाख टन आटा और उससे संबंधित उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी गई है। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि अन्य देशों की खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए उनकी सरकारों के अनुरोध पर विशेष अनुमति के तहत होने वाला निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा। यह निर्यात 25 लाख टन की तय सीमा से अतिरिक्त होगा।

क्यों लिया गया यह फैसला

गौरतलब है कि करीब चार साल बाद 13 फरवरी को सरकार ने पहली बार 25 लाख टन गेहूं निर्यात की घोषणा की थी। खाद्य मंत्रालय के अनुसार यह निर्णय मौजूदा उपलब्धता, पर्याप्त भंडार और घरेलू बाजार में कीमतों की स्थिति को देखते हुए लिया गया है। मई 2022 में उत्पादन में गिरावट और बढ़ती कीमतों पर काबू पाने के लिए गेहूं निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। हाल ही में गेहूं पर लागू स्टॉक लिमिट भी समाप्त कर दी गई है।

पर्याप्त भंडार से सरकार आश्वस्त

खाद्य मंत्रालय के मुताबिक वर्ष 2025–26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है, जो पिछले साल की समान अवधि से करीब 32 लाख टन अधिक है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम के केंद्रीय पूल में गेहूं की उपलब्धता लगभग 182 लाख टन रहने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि सीमित निर्यात से घरेलू खाद्य सुरक्षा प्रभावित नहीं होगी।

गेहूं भंडार की स्थिति (लाख टन में)

श्रेणीअनुमानित भंडार
निजी कंपनियां (2025–26)75
FCI केंद्रीय पूल (1 अप्रैल 2026)182

बढ़ा गेहूं का रकबा, बंपर उत्पादन की उम्मीद

रबी 2026 सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर लगभग 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था से किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है और इस वर्ष भी बंपर उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।

निर्यात के आसार अभी भी कमजोर

आगामी रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के दाम 250 डॉलर प्रति टन से नीचे बने हुए हैं। ऐसे में 25 लाख टन निर्यात की अनुमति मिलने के बावजूद फिलहाल भारत से बड़े पैमाने पर गेहूं निर्यात की संभावना कम मानी जा रही है। फिर भी कटाई से पहले निर्यात पर आंशिक ढील किसानों और बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

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