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Palm Oil: भारत में बढ़ी पाम ऑयल की मांग, क्या कीमतों में दिखेगा उछाल? जानें एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली, 21 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): जनवरी महीने में भारत का पाम ऑयल (Palm Oil) इंपोर्ट दिसंबर के मुकाबले करीब 51% बढ़कर 7,66,384 मीट्रिक टन पर पहुंच गया। यह स्तर सितंबर 2025 के बाद सबसे ऊंचा माना जा रहा है। बाजार अनुमान है कि फरवरी और मार्च में पाम ऑयल का आयात 8 लाख मीट्रिक टन के आसपास रह सकता है।

इसके उलट, महंगे विकल्पों से दूरी बनाते हुए सोयाबीन तेल का आयात 44% से अधिक घटकर 2.79 लाख टन पर आ गया, जो जून 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर है। वहीं सनफ्लावर ऑयल का इंपोर्ट भी 23.8% गिरकर 2.67 लाख टन रह गया।

खाने के तेल के इंपोर्ट का ट्रेंड

जनवरी के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि भारतीय बाजार अब सस्ते विकल्पों की ओर झुक रहा है। कुल खाद्य तेल आयात 3.7% घटकर 1.31 मिलियन टन रह गया, लेकिन पाम ऑयल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

खाद्य तेलजनवरी में इंपोर्ट में बदलाव
पाम ऑयल+51%
सोयाबीन तेल−44%
सनफ्लावर ऑयल−24%

सस्ता पाम ऑयल बना पहली पसंद

भारत दुनिया का सबसे बड़ा वनस्पति तेल आयातक है, इसलिए यहां की खरीदारी का असर सीधे वैश्विक बाजारों पर पड़ता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोयाबीन तेल की तुलना में पाम ऑयल करीब 100 डॉलर प्रति टन तक सस्ता मिल रहा है। इसी कीमत अंतर के कारण रिफाइनर्स और ट्रेडर्स पाम ऑयल का स्टॉक बढ़ा रहे हैं।

आगे क्या रहेगा आयात का हाल?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फरवरी में पाम ऑयल का इंपोर्ट 9–10 लाख टन तक पहुंच सकता है। हालांकि मार्च में इसमें हल्की गिरावट संभव है। फरवरी के दौरान कीमतों में नरमी आने से आयात को और सपोर्ट मिलने की उम्मीद है।

इंडोनेशिया फैक्टर और कीमतों का अनुमान

दुनिया के सबसे बड़े पाम ऑयल उत्पादक इंडोनेशिया में सालाना उत्पादन 48.5–49 मिलियन टन के आसपास है। फिलहाल वहां उत्पादन में बड़ी बढ़ोतरी के संकेत नहीं हैं। साथ ही इंडोनेशिया E50 बायोडीजल पॉलिसी पर काम कर रहा है, जिसका असर सप्लाई पर पड़ सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन के चलते शॉर्ट टर्म में खाने के तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि मजबूत मांग के कारण पाम ऑयल की कीमतों में नीचे की गिरावट सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।

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