मुंबई, 30 दिसंबर (कृषि भूमि ब्यूरो): महाराष्ट्र में एक बार फिर चीन से आने वाली किशमिश किसानों और व्यापारियों के लिए बड़ा विवाद बन गई है। राज्य के अंगूर उगाने वाले किसानों और किशमिश निर्माताओं ने सरकार से उन व्यापारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, जो घरेलू बाजार में चीनी किशमिश का आयात कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि इसी आयात की वजह से पिछले एक हफ्ते में थोक बाजार में किशमिश की कीमतें करीब 40 रुपये प्रति किलोग्राम तक गिर गई हैं।
आयात ने बिगाड़ी बाजार की चाल
महाराष्ट्र अंगूर उत्पादक संघ के हवाले से बिजनेसलाइन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन में किशमिश का नया सीजन पिछले महीने शुरू हुआ है। इसके बाद चीनी किशमिश पहले दुबई भेजी जाती है और फिर अफगानिस्तान के रास्ते भारत में एंट्री करती है। किसानों और एसोसिएशन का आरोप है कि कुछ भारतीय कारोबारी इस किशमिश को ‘अफगान किशमिश’ बताकर बाजार में बेच रहे हैं।
उनका कहना है कि इससे न सिर्फ कीमतें बिगड़ रही हैं, बल्कि खरीदारों को भी गुमराह किया जा रहा है। घटिया क्वालिटी की किशमिश सस्ते दाम पर बाजार में आने से घरेलू उत्पादकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सांगली में सबसे ज्यादा असर, स्टॉक के बावजूद दाम गिरे
महाराष्ट्र के प्रमुख अंगूर और किशमिश हब सांगली के किसानों ने बताया कि आयात ने हालात और खराब कर दिए हैं। जिले के कोल्ड स्टोरेज में पिछले सीजन की लगभग 20,000 टन किशमिश अभी भी मौजूद है। इस साल उत्पादन कम होने के कारण इस स्टॉक को अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अचानक हुए आयात ने बाजार का समीकरण बिगाड़ दिया।
व्यापारियों के अनुसार, पिछले हफ्ते सांगली मार्केट में करीब 5 टन चीनी किशमिश पहुंची, जिसके बाद कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
पहले भी उठ चुका है मामला
चीनी किशमिश आयात का यह मुद्दा नया नहीं है। इसी साल जुलाई में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने इस मसले को लेकर केंद्र सरकार को पत्र लिखा था। उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मांग की थी कि किशमिश की कीमतों को स्थिर रखने और किसानों को नुकसान से बचाने के लिए चीनी किशमिश के आयात पर तत्काल रोक लगाई जाए।
अपनी चिट्ठी में पवार ने खराब गुणवत्ता वाली किशमिश के गैर-कानूनी आयात का भी जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि बिना टैक्स चुकाए चीन से बड़ी मात्रा में किशमिश भारत लाई जा रही है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।
किसानों और उत्पादक संगठनों का कहना है कि अगर आयात पर सख्त निगरानी नहीं की गई, तो घरेलू किशमिश उद्योग को गंभीर नुकसान हो सकता है। उनका जोर है कि सरकार तुरंत कार्रवाई करे, ताकि बाजार में पारदर्शिता बनी रहे और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके।
कुलमिलाकर, चीनी किशमिश का आयात एक बार फिर महाराष्ट्र के किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गया है। कीमतों में तेज गिरावट और कथित गलत लेबलिंग ने इस मुद्दे को राजनीतिक और नीतिगत बहस के केंद्र में ला दिया है। अब सबकी नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
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