नई दिल्ली, 08 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): Sugar Stock – भारत में चालू चीनी सीजन 2025-26 के अंत तक चीनी का बकाया स्टॉक घटकर 41 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले नौ वर्षों में सबसे कम होगा। यह अनुमान नेशनल फेडरेशन ऑफ कोआपरेटिव शुगर फैक्टरीज (NFCSF) द्वारा जारी किया गया है।
इस गिरावट का मुख्य कारण उत्पादन में कमी और खपत का उच्च स्तर है। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, देश में इस सीजन के दौरान चीनी का उत्पादन घटकर 281 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि खपत लगभग 280 लाख टन रहने का अनुमान है।
इसके अलावा करीब 10 लाख टन चीनी के निर्यात के चलते कुल उपलब्ध स्टॉक (Sugar Stock) में और कमी आएगी, जो करीब 41 लाख टन पर आ सकता है। इस सीजन में अक्तूबर, 2025 में चीनी का शुरुआती स्टॉक 50 लाख टन था।
Sugar Stock: उत्पादन, खपत और स्टॉक
| पैरामीटर | अनुमान (लाख टन) |
|---|---|
| शुरुआती स्टॉक (अक्टूबर 2025) | 50 |
| कुल उत्पादन | 281 |
| घरेलू खपत | 280 |
| निर्यात | 10 |
| अंतिम स्टॉक (सितंबर 2026) | 41 |
ये आंकड़े बताते हैं कि बाजार में सप्लाई सीमित होने की स्थिति बन सकती है, हालांकि अभी कीमतों में इसका असर नजर नहीं आ रहा है।
Sugar Stock: उत्पादन में गिरावट बड़ी वजह
उद्योग के शुरुआती अनुमान के मुताबिक उत्पादन 349 लाख टन रहने की उम्मीद थी, लेकिन ताजा अनुमान में यह घटकर 281 लाख टन रह गया है।
इस गिरावट के पीछे मौसम सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है। अक्टूबर महीने में अधिक बारिश, धूप की कमी और खेतों में पानी भरने से गन्ने की फसल प्रभावित हुई।
इसके साथ ही एथेनॉल उत्पादन के लिए भी गन्ने का डायवर्जन किया गया है। इस सीजन में करीब 28 लाख टन चीनी एथेनॉल उत्पादन में जाएगी, जिससे बाजार में उपलब्धता कम हो रही है।
मिलों पर बढ़ता दबाव, किसानों में चिंता
उद्योग के अनुसार, चीनी की कीमतों में स्थिरता के कारण मिलों को नुकसान हो रहा है। सरकार द्वारा नीतिगत फैसलों में देरी से उद्योग और किसान दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
चीनी की न्यूनतम बिक्री कीमत (MSP) पिछले छह वर्षों से 31 रुपये प्रति किलो पर स्थिर है, जबकि गन्ने का फेयर एंड रिम्यूनरेटिव प्राइस (FRP) बढ़ चुका है।
मौजूदा समय में चीनी की औसत लागत करीब ₹4100 प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार भाव इससे कम है, जिससे मिलों को प्रति क्विंटल लगभग ₹250 का नुकसान हो रहा है।
इस स्थिति से किसानों में भी चिंता बढ़ रही है, क्योंकि यदि गन्ने की खेती लाभकारी नहीं रही तो आने वाले वर्षों में उत्पादन और गिर सकता है।
Sugar Stock: निर्यात और वैश्विक बाजार का असर
सरकार ने 20 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी है, लेकिन अब तक केवल 7.5 लाख टन के सौदे ही हो पाए हैं।
कुछ निर्यात शिपमेंट भू-राजनीतिक कारणों से ट्रांजिट में अटके हुए हैं। उम्मीद है कि सीजन के अंत तक करीब 10 लाख टन निर्यात पूरा हो सकेगा।
वैश्विक स्तर पर ब्राज़ील द्वारा एथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के फैसले से अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो सकती है, जिससे भविष्य में कीमतों को समर्थन मिल सकता है।
आगे क्या है संकेत?
Sugar Stock – स्टॉक में गिरावट और उत्पादन कम होने के बावजूद कीमतों का स्थिर रहना एक असामान्य स्थिति है। यदि खपत 285-290 लाख टन तक पहुंचती है और निर्यात बढ़ता है, तो अक्टूबर 2026 तक स्टॉक 40 लाख टन से भी नीचे जा सकता है।
सरकार आमतौर पर तीन महीने की खपत के बराबर स्टॉक बनाए रखने की कोशिश करती है, लेकिन मौजूदा हालात में यह संतुलन बिगड़ सकता है।
ऐसे में उद्योग ने सरकार से MSP बढ़ाकर ₹41 प्रति किलो करने और एथेनॉल कीमतों में संशोधन की मांग की है, ताकि मिलों और किसानों दोनों को राहत मिल सके।
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