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Rice Crisis 2026: खाद-डीजल संकट से जूझता दक्षिण-पूर्व एशिया: धान उत्पादन पर बड़ा खतरा, वैश्विक खाद्य संकट की आशंका

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): Rice Crisis 2026 – दक्षिण-पूर्व एशिया, जिसे दुनिया का “राइस बाउल” कहा जाता है, इस समय एक गहरे कृषि संकट का सामना कर रहा है। 2026 में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में आई बाधाओं ने धान उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। कई देशों में किसान तैयार फसल की कटाई तक नहीं कर पा रहे, जबकि नई बुवाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। खाद-डीजल संकट से जूझता दक्षिण-पूर्व एशिया: धान उत्पादन पर बड़ा खतरा

सप्लाई चेन संकट ने बढ़ाई मुश्किल

Hormuz Strait के बाधित रहने से कच्चे तेल, गैस और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर पड़ा है, जहां डीजल और खाद की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

खेती में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और अन्य मशीनों को चलाने की लागत कई इलाकों में दोगुनी या तीन गुनी तक पहुंच गई है। इससे छोटे और मध्यम किसानों के लिए खेती करना बेहद कठिन हो गया है।

खेतों में खड़ी फसल, कटाई टली

Thailand और Cambodia जैसे देशों में किसान तैयार धान की फसल को काटने में देरी कर रहे हैं। लागत इतनी अधिक हो चुकी है कि कई किसान फसल को खेत में ही छोड़ने को मजबूर हैं, जिससे गुणवत्ता खराब हो रही है और नुकसान बढ़ रहा है।

Philippines में भी हालात चिंताजनक हैं। बढ़ती लागत और कमजोर बाजार कीमतों के कारण किसान कटाई और परिवहन से बच रहे हैं, जिससे उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

Rice Crisis 2026

Rice Crisis 2026: बुवाई पर असर, घटेगा उत्पादन

संकट का असर आने वाले सीजन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। किसान नई फसल की बुवाई को लेकर असमंजस में हैं।

Vietnam के मेकांग डेल्टा में, जहां आमतौर पर साल में तीन बार धान उगाया जाता है, अब कई किसान केवल दो फसलें लेने की योजना बना रहे हैं।

कई क्षेत्रों में किसान वैकल्पिक फसलों जैसे मक्का की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि इसमें कम पानी और कम ईंधन की जरूरत होती है।

Rice Crisis 2026: बढ़ती लागत और घटती कमाई

डीजल की कीमतों में भारी उछाल ने सिंचाई और कटाई दोनों की लागत को काफी बढ़ा दिया है, जबकि खाद की कमी के कारण किसान नई बुवाई करने से हिचक रहे हैं। सप्लाई चेन में बाधा आने से खेती का पूरा उत्पादन चक्र प्रभावित हुआ है। दूसरी ओर, बाजार में चावल के दाम अपेक्षाकृत कम बने हुए हैं, जिससे किसानों का मुनाफा तेजी से घटा है और कई मामलों में खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।

वैश्विक खाद्य संकट की आशंका

Food and Agriculture Organization के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो 2026 के दूसरे हिस्से में वैश्विक खाद्य संकट गहरा सकता है।

दक्षिण-पूर्व एशिया वैश्विक चावल उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा देता है। ऐसे में यहां उत्पादन में गिरावट का असर पूरी दुनिया की खाद्य कीमतों और आपूर्ति पर पड़ सकता है।

Rice Crisis 2026: भारत के लिए संकेत

India में फिलहाल धान की मुख्य बुवाई का समय कुछ महीने दूर है, जिससे तत्काल प्रभाव सीमित है। वहीं China भी इस संकट से अपेक्षाकृत कम प्रभावित है। हालांकि, अगर वैश्विक उत्पादन घटता है, तो इसका असर भारत के खाद्य बाजार और निर्यात नीति पर भी पड़ सकता है।

ताजा संकेत बताते हैं कि यदि ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले महीनों में चावल की वैश्विक कीमतों में तेज उछाल संभव है। इससे खाद्य महंगाई और आपूर्ति संकट की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका असर विकासशील देशों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा।

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