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Crop Damage: बारिश और ओलावृष्टि से कई राज्यों में फसलें तबाह, किसानों ने उठाई मुआवजे की मांग

Crop Damge

नई दिल्ली 06 अप्रैल (कृषि भूमि ब्यूरो): Crop Damage – अप्रैल के पहले सप्ताह में सक्रिय भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा बताए गए पश्चिमी विक्षोभ के असर से देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत के राज्यों में खड़ी और कटाई के लिए तैयार फसलें बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं।

गेहूं, सरसों, चना और सब्जियों जैसी प्रमुख फसलें इस असामान्य मौसम की चपेट में आई हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

Crop Damage: किन राज्यों में कितना नुकसान

सबसे ज्यादा असर राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में देखा गया है।

Crop Damageराजस्थान के जयपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, अजमेर, चूरू और सीकर जैसे जिलों में ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, इसबगोल और जीरा की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई स्थानों पर खेतों में ओलों की सफेद परत जम गई, जिससे पूरी फसल बर्बाद हो गई।

Crop Damage – महाराष्ट्र में स्थिति और गंभीर है, जहां लगभग 1.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है। नासिक, जलगांव, अहिल्यानगर और बुलढाणा जैसे क्षेत्रों में अंगूर, आम, प्याज और केले के बागानों को भारी नुकसान पहुंचा है।

उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में 4,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहूं और सरसों की फसल गिर गई है। तेज हवाओं और बारिश के कारण गेहूं की बालियां जमीन पर बिछ गई हैं, जिससे दानों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा है।

हरियाणा और पंजाब में भी ओलावृष्टि ने खड़ी फसलों को चपटा कर दिया है। कई जिलों में गेहूं और सरसों की पैदावार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

उत्पादन और गुणवत्ता पर असर

विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय फसलें कटाई के लिए तैयार थीं, ऐसे में बारिश और ओलावृष्टि का असर सबसे ज्यादा पड़ा है। भीगी हुई फसलें मंडियों में कम कीमत पर बिकती हैं, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है।

Crop Damage – गेहूं के मामले में दानों के सिकुड़ने और काला पड़ने का खतरा बढ़ गया है, जबकि सरसों की फलियां टूटने से उत्पादन में गिरावट आ सकती है। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, कई इलाकों में 30 से 40 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है।

गेहूं उत्पादन पर मंडराया खतरा

व्यापारियों और किसानों का मानना है कि 2026 में गेहूं उत्पादन पिछले साल से अधिक हो सकता था, लेकिन मौसम की मार के कारण अब यह अनुमान घट सकता है। पहले मार्च में पड़ी गर्मी और अब बारिश-ओलावृष्टि के कारण फसल दोहरी मार झेल रही है।

Crop Damage: किसानों की मुआवजे की मांग तेज

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि खेत को इकाई मानकर सर्वे किया जाए और किसानों को जल्द से जल्द उचित मुआवजा दिया जाए।

कई राज्य सरकारों ने नुकसान (Crop Damage) के आकलन के लिए टीमों को भेजने की बात कही है और कुछ जगहों पर अंतरिम राहत की घोषणा भी की गई है। हालांकि किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर सहायता जल्द पहुंचनी चाहिए।

आगे कैसा रहेगा मौसम

IMD के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी खत्म नहीं हुआ है। 7 और 8 अप्रैल को इसकी तीव्रता चरम पर रहने की संभावना है, जिससे उत्तर-पश्चिम भारत में फिर बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है।

मध्य और पूर्वी भारत में भी 8 अप्रैल तक गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना बनी हुई है। मराठवाड़ा, विदर्भ, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड में भी ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है।

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