नई दिल्ली, 13 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): केंद्र सरकार ने करीब चार साल बाद गेहूं के निर्यात पर लगी रोक को हटाते हुए 25 लाख टन गेहूं के निर्यात को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही पहले स्वीकृत 5 लाख टन के अलावा 5 लाख टन अतिरिक्त गेहूं उत्पादों के निर्यात और 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की अनुमति भी दी गई है। इन फैसलों की जानकारी शुक्रवार को खाद्य मंत्रालय ने दी।
सरकार का कहना है कि यह कदम घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने, गिरती कीमतों को सहारा देने और किसानों को बेहतर दाम दिलाने में मदद करेगा।
2022 में क्यों लगा था प्रतिबंध
मई 2022 में गेहूं उत्पादन में गिरावट और कीमतों में तेजी को देखते हुए सरकार ने गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध लगाया था। इसके साथ ही समय-समय पर स्टॉक लिमिट भी लागू की गई थी। हाल ही में गेहूं पर स्टॉक लिमिट हटाए जाने के बाद अब निर्यात खोलने का फैसला लिया गया है।
सरकार के अनुसार, देश में पर्याप्त भंडार, बंपर उत्पादन की संभावना और घरेलू बाजार में नरम पड़ती कीमतों ने इस निर्णय का रास्ता साफ किया है।
कितना निर्यात और किसे मंजूरी
| वस्तु | निर्यात मात्रा |
|---|---|
| गेहूं | 25 लाख टन |
| गेहूं उत्पाद | 5 लाख टन (अतिरिक्त) |
| चीनी | 5 लाख टन (अतिरिक्त) |
खाद्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह अनुमति घरेलू खाद्य सुरक्षा को प्रभावित किए बिना दी गई है।
गेहूं का पर्याप्त भंडार
मंत्रालय के अनुसार 2025–26 के दौरान निजी कंपनियों के पास लगभग 75 लाख टन गेहूं का भंडार उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 32 लाख टन अधिक है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 तक भारतीय खाद्य निगम के केंद्रीय पूल में लगभग 182 लाख टन गेहूं उपलब्ध रहने का अनुमान है।
सरकार का मानना है कि इतनी उपलब्धता के बीच निर्यात की अनुमति देने से घरेलू जरूरतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
रबी 2026 में बढ़ा गेहूं रकबा
रबी 2026 सीजन में गेहूं का रकबा बढ़कर करीब 334.17 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 328.04 लाख हेक्टेयर था। न्यूनतम समर्थन मूल्य और सरकारी खरीद व्यवस्था के चलते किसानों का भरोसा मजबूत हुआ है। आगामी रबी मार्केटिंग सीजन के लिए गेहूं का एमएसपी 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
अतिरिक्त चीनी निर्यात कोटा
सरकार ने चालू चीनी सत्र 2025–26 के लिए इच्छुक मिलों को 5 लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की भी मंजूरी दी है। इससे पहले 15 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति दी जा चुकी थी। शर्त के अनुसार मिलों को 30 जून 2026 तक आवंटित मात्रा का कम से कम 70 प्रतिशत निर्यात करना होगा।
सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से गेहूं और चीनी दोनों के अधिशेष भंडार के बेहतर प्रबंधन, बाजार में स्थिरता और किसानों की आय को मजबूती मिलेगी।
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