नई दिल्ली, 24 नवम्बर, 2025 (कृषि भूमि ब्यूरो): एक ओर जहाँ देश भर में किसान घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी फसलों के लिए खाद का इंतज़ार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सब्सिडी वाले कृषि-ग्रेड यूरिया की अवैध तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है। हरियाणा के यमुनानगर ज़िले में कृषि विभाग की टीम ने कालाबाजारी के एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए लगभग 300 बोरी सरकारी सब्सिडी वाला यूरिया जब्त किया है।
क्या है मामला?
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर यमुनानगर के मेहलनवाली गाँव के पास एक ट्रक को पकड़ा। जांच के दौरान ट्रक में सब्सिडी वाला यूरिया मिला, जिसे अवैध तरीके से कहीं और ले जाया जा रहा था। जब्त किया गया यह माल कुरुक्षेत्र ज़िले में स्थित एक को-ऑपरेटिव सोसाइटी का बताया जा रहा है।
औद्योगिक इस्तेमाल के लिए अवैध तस्करी
जांच अधिकारियों के अनुसार, इस बात की प्रबल आशंका है कि सस्ते कृषि-ग्रेड यूरिया को स्थानीय प्लाईवुड फैक्ट्रियों में पहुँचाया जा रहा था। औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाला टेक्निकल-ग्रेड यूरिया महंगा होता है, इसलिए फैक्टरी मालिक लागत बचाने के लिए सब्सिडी वाले इस यूरिया का इस्तेमाल औद्योगिक गोंद (चिपकने वाला पदार्थ) बनाने में करते हैं।
यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है, क्योंकि कृषि-ग्रेड यूरिया पर सरकार भारी सब्सिडी देती है और यह केवल खेती के उपयोग के लिए होता है। इस तरह की कालाबाजारी न केवल सरकारी खजाने को चूना लगाती है, बल्कि खाद की कमी से जूझ रहे किसानों की परेशानी को भी बढ़ाती है।
विभाग ने की त्वरित कार्रवाई
यमुनानगर के कृषि उपनिदेशक डॉ. आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि 21 नवंबर की शाम को विशेष सूचना मिलने के तुरंत बाद उप मंडल कृषि अधिकारी (जगाधरी) अजय कुमार के नेतृत्व में टीम सक्रिय हुई और ट्रक को जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान ट्रक चालक मौके से भाग निकला, जिसकी तलाश जारी है।
अधिकारियों ने को-ऑपरेटिव सोसाइटी के इंचार्ज की भूमिका को भी संदिग्ध माना है और उस पर अवैध रूप से यूरिया बाहर भेजने में मिलीभगत का आरोप लगाया है। जब्त यूरिया के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं ताकि उसकी गुणवत्ता और मिलावट की पुष्टि हो सके।
विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज
इस मामले में अजय कुमार की शिकायत पर 22 नवंबर को जगाधरी सदर थाने में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और खाद (नियंत्रण आदेश) 1985 की संबंधित धाराओं के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं के तहत मामला पंजीकृत किया गया है।
पुलिस अब फरार ड्राइवर और इस पूरे कालाबाजारी रैकेट से जुड़े अन्य दोषियों की तलाश में जुटी है। यह कार्रवाई उन सभी तत्वों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो किसानों के हक को मारकर अवैध लाभ कमाने की कोशिश कर रहे हैं।
===
हमारे लेटेस्ट अपडेट्स और खास जानकारियों के लिए अभी जुड़ें — बस इस लिंक पर क्लिक करें:
https://whatsapp.com/channel/0029Vb0T9JQ29759LPXk1C45