नई दिल्ली, 30 जुलाई (कृषि भूमि ब्यूरो):
बिहार की मंडियों में इस समय मक्का (Maize) की कीमतों में मोटेतौर पर स्थिरता देखी जा रही है। राज्य के विभिन्न जिलों में न तो कीमतों में कोई विशेष उछाल देखा गया है और न ही गिरावट। इसका मुख्य कारण है स्थानीय आपूर्ति और खपत के बीच बना संतुलन, जिससे बाज़ार में उतार-चढ़ाव नहीं दिख रहा है।
फसल की आवक नियमित, भंडारण की स्थिति संतोषजनक
राज्य के प्रमुख मक्का उत्पादक जिलों जैसे पूर्णिया, कटिहार, मधेपुरा, सहरसा और अररिया में फसल की आवक सामान्य रही है। किसानों ने समय पर कटाई की और अब उत्पाद मंडियों तक लगातार पहुँच रहा है। इसके अतिरिक्त, निजी और सरकारी गोदामों में भंडारण व्यवस्था बेहतर होने के कारण आपूर्ति बाधित नहीं हुई।
खरीदारों — विशेष रूप से पोल्ट्री फीड, स्टार्च मिल्स और ट्रेडर्स — की मांग भी स्थिर बनी हुई है। इस कारण कीमतों में किसी भी प्रकार की दबाव की स्थिति नहीं देखी जा रही है।
कीमतों की स्थिति: न अधिक, न कम
बिहार की प्रमुख मंडियों में मक्का की औसत कीमत ₹1,850 से ₹2,000 प्रति क्विंटल के आसपास बनी हुई है, जो न केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के पास है, बल्कि किसानों को लाभकारी दर भी प्रदान कर रही है।
सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, जुलाई के अंतिम सप्ताह में मक्का की कीमतों में 0.5% से भी कम उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया है। यह संकेत है कि बाजार संतुलित है और मांग-आपूर्ति के अनुसार स्थिर बना हुआ है।
मौसम और फसल की गुणवत्ता का सकारात्मक प्रभाव
बिहार में इस बार मानसून समय पर आया और अनुकूल वर्षा के चलते मक्का की गुणवत्ता पर सकारात्मक असर पड़ा है। किसानों ने बताया है कि गुणवत्ता बेहतर होने से व्यापारी सीधे खेतों से ही खरीद कर रहे हैं, जिससे बाजार में अनावश्यक बिचौलियों की भूमिका कम हो रही है और कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
बिहार में मक्का के दामों में जो स्थिरता देखी जा रही है, वह एक स्वस्थ और संतुलित कृषि बाजार का संकेत है। किसानों को उचित मूल्य मिल रहा है, खरीदारों को समय पर माल मिल रहा है, और सरकार की ओर से किसी प्रकार का दखल या नियंत्रण फिलहाल आवश्यक नहीं है। यदि मौसम अनुकूल बना रहता है और आयात/निर्यात नीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता, तो यह स्थिरता अगस्त महीने में भी बनी रह सकती है।
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