पटना, 23 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): बिहार ने कृषि निर्यात के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। राज्य से मखाना (Fox Nut) का निर्यात अब रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। बीते हफ्ते बिहटा ड्राई पोर्ट से 5 टन मखाना चीन के लिए रवाना किया गया, जो कोलकाता के रास्ते समुद्री मार्ग से चीन पहुंचेगा।
पिछले छह महीनों में बिहार ने अलग-अलग देशों को कुल 120 टन मखाना निर्यात किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
केंद्र-राज्य के समन्वय से मिली सफलता
इस उपलब्धि के पीछे एपिडा और मखाना विकास बोर्ड की अहम भूमिका रही है। राज्य में एपिडा कार्यालय और मखाना विकास बोर्ड की स्थापना के बाद निर्यात को नई रफ्तार मिली है।
यह निर्यात केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, बिहार सरकार और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के संयुक्त प्रयासों से संभव हुआ है।
किन देशों में जाता है बिहार का मखाना
बिहार दुनिया में मखाना का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है। खासतौर पर मिथिला क्षेत्र के मखाना को GI Tag प्राप्त है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई है।
पिछले छह महीनों में बिहार से इन प्रमुख देशों में मखाना भेजा गया है:
| देश | उपयोग / मांग |
|---|---|
| अमेरिका | हेल्थ फूड, स्नैक्स |
| कनाडा | डायट फूड |
| न्यूजीलैंड | ऑर्गेनिक उत्पाद |
| संयुक्त अरब अमीरात | ड्राई फ्रूट व प्रीमियम सेगमेंट |
| चीन | खाद्य और पारंपरिक दवाइयां |
पहले मखाना को ड्राई फ्रूट्स की श्रेणी में रखा जाता था, लेकिन अब इसे अलग HS Code मिल चुका है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आसान हुआ है।
चीन क्यों खरीदता है बिहार का मखाना
चीन में मखाना को “कियान शी” कहा जाता है। वहां इसका उपयोग सिर्फ खाने तक सीमित नहीं है, बल्कि Traditional Chinese Medicine (TCM) में भी मखाना अहम कच्चा माल है।
चीन में मखाना को एक तरह की जड़ी-बूटी माना जाता है। खासकर किडनी से जुड़ी बीमारियों के इलाज में मखाना से बनी दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। भारत और चीन के बीच हाल के महीनों में बेहतर हुए व्यापारिक संबंधों का असर भी इस बढ़ते निर्यात में दिख रहा है।
ग्लूटेन-फ्री होने से बढ़ी वैश्विक मांग
लो-कैलोरी, हाई-फाइबर और ग्लूटेन-फ्री होने के कारण मखाना की अंतरराष्ट्रीय बाजार में जबरदस्त मांग है। अमेरिका इस समय बिहार के मखाना का सबसे बड़ा खरीदार है, इसके बाद नेपाल और UAE का स्थान आता है।
हालांकि, ट्रंप टैरिफ के चलते पिछले साल मखाना निर्यात प्रभावित हुआ था। अगस्त 2025 में अमेरिका में मखाना की कीमत ₹10,000 से ₹15,000 प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इसी वजह से बिहार के निर्यातक अब नए वैश्विक बाजारों, खासकर एशिया और मिडिल ईस्ट की ओर रुख कर रहे हैं।
कुलमिलाकर, मखाना निर्यात में बिहार की यह सफलता न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रही है, बल्कि किसानों और प्रोसेसिंग से जुड़े उद्यमियों के लिए भी नए अवसर खोल रही है। आने वाले समय में यदि यही रफ्तार बनी रही, तो बिहार वैश्विक मखाना बाजार का लीडर बन सकता है।
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