नई दिल्ली, 12 फरवरी (कृषि भूमि ब्यूरो): भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर जारी आधिकारिक फैक्ट शीट में White House ने कई अहम बदलाव किए हैं। इन संशोधनों में सबसे बड़ा बदलाव दालों (pulses) से जुड़े उल्लेख को हटाना और दस्तावेज़ की भाषा को पहले से अधिक नरम बनाना माना जा रहा है।
फैक्ट शीट की संशोधित भाषा को 7 फरवरी को जारी भारत-अमेरिका के साझा बयान के अनुरूप ढाला गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि समझौते पर बातचीत अभी जारी है और इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है।
दालों का उल्लेख क्यों हटाया गया?
मूल फैक्ट शीट में “certain pulses” यानी कुछ दालों पर भारत द्वारा टैरिफ घटाने का जिक्र था। इन्हें लाल ज्वार, ट्री नट्स, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पादों की सूची में शामिल किया गया था। लेकिन संशोधित फैक्ट शीट में दालों का उल्लेख पूरी तरह हटा दिया गया है।
भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। यह मुद्दा सीधे तौर पर दलहन किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जाता है। दालों को लेकर विपक्षी दलों और किसान संगठनों की ओर से सवाल उठाए जा रहे थे, जिससे राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो रहा था।
‘Committed’ की जगह ‘Intends’: भाषा में बड़ा बदलाव
फैक्ट शीट में दूसरा बड़ा बदलाव भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों की खरीद से जुड़ा है। पहले दस्तावेज़ में 500 अरब डॉलर की खरीद को लेकर “committed” यानी प्रतिबद्धता शब्द का इस्तेमाल किया गया था।
संशोधित संस्करण में इसे बदलकर “intends” यानी “इरादा” कर दिया गया है। इसके साथ ही उत्पादों की सूची से “agricultural” शब्द भी हटा दिया गया है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि यह कोई बाध्यकारी वादा नहीं, बल्कि भविष्य की संभावित दिशा को दर्शाने वाला बयान है।
व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं
इन सभी बदलावों को लेकर व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। संशोधन बिना किसी घोषणा के चुपचाप किए गए हैं।
जानकारों का मानना है कि भारत की ओर से फैक्ट शीट की भाषा और कुछ बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद इसमें सुधार किया गया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत अब भी जारी है।
कुलमिलाकर, India US Trade Deal से जुड़ी फैक्ट शीट में किए गए बदलाव यह दिखाते हैं कि समझौता अभी पूरी तरह तय नहीं हुआ है। दालों जैसे संवेदनशील मुद्दे को हटाना और “प्रतिबद्धता” की जगह “इरादा” जैसे शब्दों का इस्तेमाल, दोनों ही पक्षों के लिए बातचीत की गुंजाइश को खुला रखने की रणनीति का संकेत देते हैं। आने वाले दिनों में इस समझौते को लेकर और स्पष्टता सामने आ सकती है।
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